राज्यवार प्रमुख विवाह रस्में
भारतीय विवाह कई दिनों के भव्य आयोजन होते हैं, जिनमें अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों की अलग-अलग रस्में और समारोह होते हैं। स्थानीय संस्कृति, परंपरा और धर्म में रची-बसी ये रस्में भारतीय समाज की विविधता और समृद्धि दिखाती हैं। हमने भारत के विभिन्न राज्यों की कुछ प्रमुख विवाह रस्में और उनका महत्व संकलित किया है, जिनमें कुछ स्थानीय और कम-जानी रस्में भी हैं।
ध्यान दें: यह जानकारी केवल प्रतिनिधित्व के लिए और नई पीढ़ी को जानकारी देने के उद्देश्य से है; वास्तविक विवाह में इससे कहीं अधिक परंपराएँ होती हैं।
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
- रोका
- रस्म: उपहारों के आदान-प्रदान के साथ औपचारिक सगाई।
- महत्व: दोनों परिवारों के बीच रिश्ते की औपचारिक घोषणा होती है।
- हल्दी
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन को हल्दी का उबटन लगाया जाता है।
- महत्व: शादी से पहले उन्हें शुद्ध करती है और उनकी सुंदरता निखारती है।
- पारंपरिक नृत्य और संगीत
- रस्म: स्थानीय कलाकार अपनी प्रस्तुति देते हैं।
- महत्व: शादी के उत्सव में सांस्कृतिक रंग और खुशी भर देती है।
- कन्यादान
- रस्म: दुल्हन का परिवार उसका हाथ दूल्हे को सौंपता है।
- महत्व: दुल्हन के दूल्हे के परिवार में औपचारिक रूप से जाने का प्रतीक है।
- सप्तपदी
- रस्म: जोड़ा पवित्र अग्नि के चारों ओर सात कदम चलता है।
- महत्व: हर कदम उनके वैवाहिक जीवन के एक वचन का प्रतीक है।
- विदाई
- रस्म: दुल्हन अपने परिवार से विदा लेती है।
- महत्व: दूल्हे के साथ उसके नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक है।
- रिसेप्शन
- रस्म: एक औपचारिक आयोजन, जिसमें जोड़े का परिचय दूल्हे के विस्तृत परिवार से कराया जाता है।
- महत्व: उनके मिलन और साथ के नए जीवन का जश्न मनाया जाता है।
- गृहप्रवेश
- रस्म: दुल्हन का उसके नए घर में स्वागत किया जाता है।
- महत्व: दूल्हे के परिवार में उसकी नई भूमिका का प्रतीक है।
आंध्र प्रदेश
- पेल्ली चूपुलु
- रस्म: शादी तय करने के लिए दोनों परिवारों की औपचारिक मुलाकात।
- महत्व: शादी की तैयारियाँ शुरू होती हैं और रिश्ता पक्का माना जाता है।
- पेंडलिकूतुरु
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन को हल्दी का उबटन लगाया जाता है।
- महत्व: शादी से पहले जोड़े को शुद्ध करती है।
- कन्यादान
- रस्म: दुल्हन के पिता उसका हाथ दूल्हे को सौंपते हैं।
- महत्व: पिता के आशीर्वाद और दुल्हन के नए जीवन में कदम रखने का प्रतीक है।
- सप्तपदी
- रस्म: जोड़ा पवित्र अग्नि के चारों ओर सात कदम चलता है।
- महत्व: हर कदम सुखी और समृद्ध वैवाहिक जीवन के एक वचन का प्रतीक है।
- जीलकर्र-बेल्लम
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन एक-दूसरे के सिर पर जीरा और गुड़ का लेप रखते हैं।
- महत्व: विवाह में एकता और मिठास का प्रतीक है।
- अरुंधती नक्षत्रम
- रस्म: जोड़े को अरुंधती तारा दिखाया जाता है।
- महत्व: आकाश के उस पुण्य जोड़े जैसा बनने की प्रेरणा देती है।
- निश्चितार्थम
- रस्म: सगाई की रस्म, जिसमें जोड़ा एक-दूसरे को अंगूठी पहनाता है।
- महत्व: दूल्हा-दुल्हन के बीच औपचारिक वचनबद्धता का प्रतीक है।
- पेल्लिकुतुरु
- रस्म: दुल्हन को हल्दी और चंदन का लेप लगाया जाता है।
- महत्व: शादी से पहले दुल्हन को शुद्ध करती है और उसकी सुंदरता निखारती है।
- कन्यादानम
- रस्म: दुल्हन के पिता उसका हाथ दूल्हे को सौंपते हैं।
- महत्व: दुल्हन के दूल्हे के परिवार में जाने का प्रतीक है।
- वरमाला
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन एक-दूसरे को फूलों की माला पहनाते हैं।
- महत्व: आपसी स्वीकृति और सम्मान का प्रतीक है।
- अग्नि पूजा
- रस्म: जोड़ा पवित्र अग्नि के चारों ओर पूजा-विधि करता है।
- महत्व: जोड़े द्वारा लिए गए वचनों का साक्षी अग्नि देवता होते हैं।
- विदाई
- रस्म: दुल्हन कंधे के ऊपर से चावल फेंकते हुए मायके से विदा होती है।
- महत्व: उसकी नई यात्रा के लिए आशीर्वाद का प्रतीक है।
- रिसेप्शन
- रस्म: एक औपचारिक आयोजन, जिसमें जोड़े का परिचय दूल्हे के विस्तृत परिवार और मित्रों से कराया जाता है।
- महत्व: उनके मिलन और साथ के नए जीवन का जश्न मनाया जाता है।
- गृहप्रवेश
- रस्म: दुल्हन का उसके नए घर में पारंपरिक रस्म के साथ स्वागत किया जाता है।
- महत्व: दूल्हे के परिवार में उसकी नई भूमिका और स्थान का प्रतीक है।
- सत्यनारायण स्वामी व्रतम
- रस्म: नवविवाहित जोड़ा ईश्वर का आशीर्वाद पाने के लिए पूजा करता है।
- महत्व: वैवाहिक जीवन में समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है।
अरुणाचल प्रदेश
- रोका
- रस्म: औपचारिक सगाई, जिसमें उपहार और मिठाइयों का आदान-प्रदान होता है।
- महत्व: विवाह के प्रति वचनबद्धता का प्रतीक है।
- हल्दी
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन को हल्दी का उबटन लगाया जाता है।
- महत्व: उन्हें शुद्ध करती है और उनकी सुंदरता निखारती है।
- बकर
- रस्म: शादी से पहले पारंपरिक नृत्य और संगीत की प्रस्तुति होती है।
- महत्व: आने वाले मिलन का जश्न मनाया जाता है।
- मंगल पूजा
- रस्म: पवित्र अग्नि के चारों ओर धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।
- महत्व: विवाह के आध्यात्मिक पक्ष का प्रतीक है।
- फूलों की चादर
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन के ऊपर फूलों की चादर तानी जाती है।
- महत्व: ईश्वरीय आशीर्वाद का प्रतीक है।
- विदाई
- रस्म: दुल्हन अपने परिवार से विदा लेती है।
- महत्व: दूल्हे के साथ उसके नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक है।
- रिसेप्शन
- रस्म: एक औपचारिक आयोजन, जिसमें जोड़े का परिचय दूल्हे के विस्तृत परिवार और मित्रों से कराया जाता है।
- महत्व: उनके मिलन का जश्न मनाया जाता है।
- गृहप्रवेश
- रस्म: दुल्हन का उसके नए घर में स्वागत किया जाता है।
- महत्व: दूल्हे के परिवार में उसकी नई भूमिका का प्रतीक है।
- विवाह के बाद की पूजा
- रस्म: जोड़े के नए जीवन के लिए आशीर्वाद पाने हेतु की जाती है।
- महत्व: सुख और समृद्धि बनी रहती है।
- आशीर्वाद
- रस्म: बड़े-बुज़ुर्ग नवविवाहित जोड़े को आशीर्वाद देते हैं।
- महत्व: सफल वैवाहिक जीवन के लिए आशीर्वाद मिलता है।
असम
- भात मंगल
- रस्म: शादी से पहले रिश्तेदारों के साथ भोज।
- महत्व: आने वाले मिलन का जश्न मनाया जाता है और पारिवारिक रिश्ते मज़बूत होते हैं।
- हल्दी
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन को हल्दी का उबटन लगाया जाता है।
- महत्व: जोड़े को शुद्ध करती है और उनकी सुंदरता निखारती है।
- जऊ भात
- रस्म: दुल्हन का परिवार दूल्हे के परिवार के लिए खास भोजन तैयार करता है।
- महत्व: मेहमाननवाज़ी और पारिवारिक जुड़ाव का प्रतीक है।
- कन्यादान
- रस्म: दुल्हन का परिवार उसका हाथ दूल्हे को सौंपता है।
- महत्व: दुल्हन के दूल्हे के परिवार में औपचारिक रूप से जाने का प्रतीक है।
- सप्तपदी
- रस्म: जोड़ा पवित्र अग्नि के चारों ओर सात कदम चलता है।
- महत्व: हर कदम उनके वैवाहिक जीवन के एक वचन का प्रतीक है।
- विदाई
- रस्म: दुल्हन अपने परिवार से विदा लेती है।
- महत्व: दूल्हे के साथ उसके नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक है।
- रिसेप्शन
- रस्म: एक औपचारिक आयोजन, जिसमें जोड़े का परिचय दूल्हे के विस्तृत परिवार से कराया जाता है।
- महत्व: उनके मिलन और साथ के नए जीवन का जश्न मनाया जाता है।
- गृहप्रवेश
- रस्म: दुल्हन का उसके नए घर में स्वागत किया जाता है।
- महत्व: दूल्हे के परिवार में उसकी नई भूमिका का प्रतीक है।
बिहार
- कुरमाई
- रस्म: सगाई की रस्म, जिसमें दूल्हे का परिवार उपहार लेकर दुल्हन के घर जाता है।
- महत्व: शादी की प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक है।
- हल्दी
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन को हल्दी का उबटन लगाया जाता है।
- महत्व: जोड़े को शुद्ध करती है और उनकी सुंदरता निखारती है।
- बारात
- रस्म: दूल्हे की बारात संगीत और नाच-गाने के साथ दुल्हन के घर पहुँचती है।
- महत्व: दूल्हे के आगमन और दोनों परिवारों के मिलन का जश्न मनाया जाता है।
- जयमाला
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन एक-दूसरे को फूलों की माला पहनाते हैं।
- महत्व: आपसी स्वीकृति और सम्मान का प्रतीक है।
- सात फेरे
- रस्म: जोड़ा पवित्र अग्नि के सात फेरे लेता है।
- महत्व: विवाह के सात वचनों का प्रतीक है।
- विदाई
- रस्म: दुल्हन अपने नए घर जाते समय परिवार से विदा लेती है।
- महत्व: दूल्हे के साथ दुल्हन के नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक है।
चंडीगढ़
- रोका
- रस्म: उपहारों के आदान-प्रदान के साथ औपचारिक सगाई।
- महत्व: दोनों परिवारों के बीच रिश्ते की औपचारिक घोषणा होती है।
- हल्दी
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन को हल्दी का उबटन लगाया जाता है।
- महत्व: शादी से पहले उन्हें शुद्ध करती है और उनकी सुंदरता निखारती है।
- पारंपरिक संगीत और नृत्य
- रस्म: स्थानीय कलाकार अपनी प्रस्तुति देते हैं।
- महत्व: शादी के उत्सव में सांस्कृतिक रंग और खुशी भर देती है।
- कन्यादान
- रस्म: दुल्हन का परिवार उसका हाथ दूल्हे को सौंपता है।
- महत्व: दुल्हन के दूल्हे के परिवार में औपचारिक रूप से जाने का प्रतीक है।
- सप्तपदी
- रस्म: जोड़ा पवित्र अग्नि के चारों ओर सात कदम चलता है।
- महत्व: हर कदम उनके वैवाहिक जीवन के एक वचन का प्रतीक है।
- विदाई
- रस्म: दुल्हन अपने परिवार से विदा लेती है।
- महत्व: दूल्हे के साथ उसके नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक है।
- रिसेप्शन
- रस्म: एक औपचारिक आयोजन, जिसमें जोड़े का परिचय दूल्हे के विस्तृत परिवार से कराया जाता है।
- महत्व: उनके मिलन और साथ के नए जीवन का जश्न मनाया जाता है।
- गृहप्रवेश
- रस्म: दुल्हन का उसके नए घर में स्वागत किया जाता है।
- महत्व: दूल्हे के परिवार में उसकी नई भूमिका का प्रतीक है।
छत्तीसगढ़
- बट्टा की रस्म
- रस्म: दूल्हे का परिवार उपहार और भेंट लेकर दुल्हन के घर जाता है।
- महत्व: रिश्ते को औपचारिक रूप देती है और पारिवारिक संबंध मज़बूत करती है।
- बड़ा खाना
- रस्म: शादी से पहले दुल्हन के परिवार की ओर से भव्य भोज।
- महत्व: मिलन का जश्न मनाया जाता है और समाज में आपसी जुड़ाव बढ़ता है।
- हल्दी की रस्म
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन को हल्दी का उबटन लगाया जाता है।
- महत्व: शादी से पहले जोड़े को शुद्ध करती है और उनकी सुंदरता निखारती है।
- संगीत
- रस्म: संगीत और नृत्य की एक रात, जिसमें दोनों परिवार शामिल होते हैं।
- महत्व: पारिवारिक रिश्ते मज़बूत होते हैं और शादी के उत्सव में खुशी बढ़ती है।
- विदाई
- रस्म: दुल्हन पति के घर जाते समय अपने परिवार से विदा लेती है।
- महत्व: दुल्हन के नए परिवार में जाने का प्रतीक है।
- बखरी
- रस्म: एक उत्सव, जिसमें दूल्हा-दुल्हन को उपहार देकर सम्मानित किया जाता है।
- महत्व: उनके नए दर्जे को मान्यता मिलती है और समाज में उनकी स्वीकृति बढ़ती है।
- गृहप्रवेश
- रस्म: दुल्हन का उसके नए घर में रस्म के साथ प्रवेश कराकर स्वागत किया जाता है।
- महत्व: उसके नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक है और घर में आशीर्वाद लाती है।
दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव
- रोका की रस्म
- रस्म: दोनों परिवार मिलकर विवाह के लिए औपचारिक सहमति देते हैं।
- महत्व: दोनों परिवारों के बीच रिश्ता और वचनबद्धता पक्की होती है।
- मेहंदी की रस्म
- रस्म: दुल्हन के हाथों और पैरों में मेहंदी लगाई जाती है।
- महत्व: दुल्हन के सौभाग्य और सुंदरता का प्रतीक है।
- हल्दी की रस्म
- रस्म: दूल्हा और दुल्हन, दोनों को हल्दी का उबटन लगाया जाता है।
- महत्व: शादी से पहले जोड़े को शुद्ध करती है और उनकी सुंदरता निखारती है।
- संगीत
- रस्म: संगीत और नृत्य से भरी एक रात, जिसमें परिवार और दोस्त शामिल होते हैं।
- महत्व: दोनों परिवारों के बीच खुशी और एकता बढ़ाती है।
- विवाह (शादी की रस्म)
- रस्म: विवाह की रस्म, जिसमें वचनों का आदान-प्रदान होता है।
- महत्व: जोड़े की एक-दूसरे के प्रति वचनबद्धता का प्रतीक है।
- विदाई
- रस्म: दुल्हन पति के घर जाते समय अपने परिवार से विदा लेती है।
- महत्व: विवाह की ओर उसकी नई यात्रा का प्रतीक है।
- गृहप्रवेश
- रस्म: दुल्हन का उसके नए घर में स्वागत किया जाता है।
- महत्व: उसके नए जीवन और नई गृहस्थी की शुरुआत का प्रतीक है।
- रिसेप्शन
- रस्म: परिवार और दोस्तों के साथ खान-पान, संगीत और नृत्य का उत्सव।
- महत्व: सब एक साथ जुटकर इस मिलन का जश्न मनाते हैं।
दिल्ली
- रोका की रस्म
- रस्म: सगाई को औपचारिक रूप देने के लिए दोनों परिवार मिलते हैं और उपहारों का आदान-प्रदान करते हैं।
- महत्व: जोड़े और उनके परिवारों की औपचारिक वचनबद्धता का प्रतीक है।
- संगीत
- रस्म: संगीत की एक शाम, जिसमें दोनों परिवार गाते और नाचते हैं।
- महत्व: आने वाले मिलन का जश्न मनाया जाता है और परिवार की खुशी बढ़ती है।
- मेहंदी की रस्म
- रस्म: दुल्हन के हाथों और पैरों में मेहंदी लगाई जाती है।
- महत्व: सुंदरता और सौभाग्य का प्रतीक है।
- हल्दी की रस्म
- रस्म: दूल्हा और दुल्हन, दोनों को हल्दी का उबटन लगाया जाता है।
- महत्व: शादी से पहले जोड़े को शुद्ध करती है और उनकी सुंदरता निखारती है।
- विदाई
- रस्म: दुल्हन पति के घर जाते समय अपने परिवार से विदा लेती है।
- महत्व: उसके नए जीवन में कदम रखने का प्रतीक है।
- गृहप्रवेश
- रस्म: दुल्हन का उसके नए घर में पारंपरिक रस्मों के साथ स्वागत किया जाता है।
- महत्व: उसकी नई शुरुआत का प्रतीक है और आशीर्वाद लाती है।
- रिसेप्शन
- रस्म: परिवार और दोस्तों के लिए खान-पान, संगीत और नृत्य के साथ भव्य उत्सव।
- महत्व: मिलन का जश्न मनाया जाता है और समाज में आपसी रिश्ते मज़बूत होते हैं।
- चौथी
- रस्म: शादी के कुछ दिन बाद होने वाली रस्म, जिसमें दुल्हन अपने मायके जाती है।
- महत्व: दुल्हन और दूल्हे के परिवारों का रिश्ता और गहरा होता है।
गोवा
- सगाई की रस्म
- रस्म: दोनों परिवार अंगूठियों और उपहारों का आदान-प्रदान करते हैं।
- महत्व: जोड़े की वचनबद्धता की औपचारिक घोषणा होती है।
- हल्दी
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन को हल्दी का उबटन लगाया जाता है।
- महत्व: शादी से पहले जोड़े को शुद्ध करती है और उनका रूप निखारती है।
- ईसाई विवाह प्रार्थना सभा
- रस्म: चर्च में होने वाली औपचारिक रस्म, जिसमें जोड़ा वचन लेता है।
- महत्व: ईश्वर की दृष्टि में इस मिलन को पवित्र बनाती है।
- पैलियम
- रस्म: दूल्हा प्रतीक के रूप में एक वस्त्र दुल्हन के कंधों पर डालता है।
- महत्व: दुल्हन के प्रति दूल्हे की सुरक्षा और देखभाल का प्रतीक है।
- रिसेप्शन
- रस्म: एक औपचारिक आयोजन, जिसमें जोड़े का परिचय परिवार और दोस्तों से कराया जाता है।
- महत्व: जोड़े के मिलन और साथ के नए जीवन का जश्न मनाया जाता है।
- गृहप्रवेश
- रस्म: दुल्हन का उसके नए घर में पारंपरिक रस्मों के साथ स्वागत किया जाता है।
- महत्व: दूल्हे के परिवार में उसकी नई भूमिका की शुरुआत का प्रतीक है।
- विवाह के बाद का भोज
- रस्म: परिवार और दोस्तों के लिए उत्सव का भोज।
- महत्व: शादी की खुशी और उल्लास झलकता है।
- आशीर्वाद समारोह
- रस्म: बड़े-बुज़ुर्ग नवविवाहित जोड़े को आशीर्वाद देते हैं।
- महत्व: सुखी और समृद्ध वैवाहिक जीवन के लिए आशीर्वाद मिलता है।
गुजरात
- गरबा/संगीत संध्या
- रस्म: शादी की खुशी में गरबा नृत्य और संगीत की एक रात।
- महत्व: दोनों परिवारों के बीच एकता और खुशी बढ़ती है।
- मेहंदी
- रस्म: दुल्हन के हाथों और पैरों में मेहंदी लगाई जाती है।
- महत्व: शुभता और खुशी का प्रतीक है।
- गृह शांति पूजा
- रस्म: कुलदेवताओं से शांति का आशीर्वाद पाने के लिए की जाने वाली रस्म।
- महत्व: वैवाहिक जीवन में सामंजस्य बना रहता है।
- मंगल फेरा
- रस्म: जोड़ा पवित्र अग्नि के चार फेरे लेता है।
- महत्व: जीवन के मुख्य पक्षों का प्रतीक है: धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष।
- सौभाग्यवती भव
- रस्म: सुहागिन महिलाएँ दुल्हन को आशीर्वाद देती हैं।
- महत्व: लंबे, सुखी और समृद्ध वैवाहिक जीवन की कामना की जाती है।
- विदाई
- रस्म: मायके से विदा होते समय दुल्हन कंधे के ऊपर से चावल फेंकती है।
- महत्व: उसकी नई यात्रा के लिए आशीर्वाद का प्रतीक है।
हरियाणा
- रोका
- रस्म: औपचारिक सगाई, जिसमें दोनों परिवार उपहारों का आदान-प्रदान करते हैं।
- महत्व: जोड़े की वचनबद्धता की औपचारिक घोषणा होती है।
- हल्दी
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन को हल्दी का उबटन लगाया जाता है।
- महत्व: शादी से पहले जोड़े को शुद्ध करती है और उनका रूप निखारती है।
- चूड़ा की रस्म
- रस्म: दुल्हन के मामा चूड़ियों का सेट उपहार में देते हैं।
- महत्व: दुल्हन के विवाहित होने का प्रतीक है।
- कन्यादान
- रस्म: दुल्हन का परिवार उसका हाथ दूल्हे को सौंपता है।
- महत्व: दुल्हन के दूल्हे के परिवार में औपचारिक रूप से जाने का प्रतीक है।
- सप्तपदी
- रस्म: जोड़ा पवित्र अग्नि के चारों ओर सात कदम चलता है।
- महत्व: हर कदम उनके वैवाहिक जीवन के एक वचन का प्रतीक है।
- विदाई
- रस्म: दुल्हन अपने परिवार से विदा लेती है।
- महत्व: दूल्हे के साथ उसके नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक है।
- रिसेप्शन
- रस्म: एक औपचारिक आयोजन, जिसमें जोड़े का परिचय दूल्हे के विस्तृत परिवार से कराया जाता है।
- महत्व: उनके मिलन और साथ के नए जीवन का जश्न मनाया जाता है।
- गृहप्रवेश
- रस्म: दुल्हन का उसके नए घर में स्वागत किया जाता है।
- महत्व: दूल्हे के परिवार में उसकी नई भूमिका का प्रतीक है।
हिमाचल प्रदेश
- कन्यादान
- रस्म: दुल्हन का परिवार उसका हाथ दूल्हे को सौंपता है।
- महत्व: दुल्हन के दूल्हे के परिवार में जाने का प्रतीक है।
- हल्दी
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन को हल्दी का उबटन लगाया जाता है।
- महत्व: उन्हें शुद्ध करती है और उनकी सुंदरता निखारती है।
- चूड़ा की रस्म
- रस्म: दुल्हन के मामा चूड़ियों का सेट उपहार में देते हैं।
- महत्व: दुल्हन के विवाहित होने का प्रतीक है।
- वरमाला
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन एक-दूसरे को माला पहनाते हैं।
- महत्व: आपसी स्वीकृति का प्रतीक है।
- सात फेरे
- रस्म: जोड़ा पवित्र अग्नि के सात फेरे लेता है।
- महत्व: विवाह के सात वचनों का प्रतीक है।
- विदाई
- रस्म: दुल्हन अपने परिवार से विदा लेती है।
- महत्व: उसके नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक है।
- रिसेप्शन
- रस्म: एक औपचारिक आयोजन, जिसमें जोड़े का परिचय दूल्हे के विस्तृत परिवार और मित्रों से कराया जाता है।
- महत्व: उनके मिलन का जश्न मनाया जाता है।
- गृहप्रवेश
- रस्म: दुल्हन का उसके नए घर में स्वागत किया जाता है।
- महत्व: दूल्हे के परिवार में उसकी नई भूमिका का प्रतीक है।
- विवाह के बाद की पूजा
- रस्म: सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद पाने के लिए की जाती है।
- महत्व: समृद्धि और खुशी बनी रहती है।
- घट पूजा
- रस्म: परिवार के घर के मंदिर में की जाने वाली पूजा-विधि।
- महत्व: सामंजस्य भरे वैवाहिक जीवन के लिए आशीर्वाद मिलता है।
जम्मू और कश्मीर
- रोका की रस्म
- रस्म: दोनों परिवार मिलकर विवाह के लिए औपचारिक सहमति देते हैं।
- महत्व: दोनों परिवारों के बीच वचनबद्धता और जुड़ाव पक्का होता है।
- मेहंदी की रस्म
- रस्म: दुल्हन के हाथों और पैरों में मेहंदी लगाई जाती है।
- महत्व: खुशी, सुंदरता और शुभता का प्रतीक है।
- शादी ख्वाब
- रस्म: शादी से पहले के उत्सव, जिनमें संगीत और नृत्य शामिल होते हैं।
- महत्व: उत्सव का माहौल बढ़ता है और पारिवारिक रिश्ते मज़बूत होते हैं।
- निकाह
- रस्म: विवाह की आधिकारिक रस्म, जिसमें जोड़ा एक-दूसरे को वचन देता है।
- महत्व: परिवार और समाज के सामने उनकी वचनबद्धता और मिलन का प्रतीक है।
- विदाई
- रस्म: दुल्हन पति के घर जाते समय अपने परिवार से विदा लेती है।
- महत्व: उसके नए परिवार में जाने का प्रतीक है।
- वलीमा
- रस्म: दूल्हे के परिवार की ओर से दिया जाने वाला रिसेप्शन।
- महत्व: विवाह का जश्न मनाया जाता है और दोनों परिवार करीब आते हैं।
- गृहप्रवेश
- रस्म: दुल्हन का उसके नए घर में स्वागत किया जाता है।
- महत्व: उसके नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक है और घर में आशीर्वाद लाती है।
झारखंड
- कन्यादान
- रस्म: रस्म के दौरान दुल्हन के पिता उसे दूल्हे को सौंपते हैं।
- महत्व: दूल्हे पर पिता के भरोसे और दुल्हन की नई शुरुआत का प्रतीक है।
- हल्दी की रस्म
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन को हल्दी का उबटन लगाया जाता है।
- महत्व: शादी से पहले जोड़े को शुद्ध करती है और उनकी सुंदरता निखारती है।
- सप्तपदी
- रस्म: जोड़ा साथ में सात कदम चलता है और हर कदम पर एक वचन लेता है।
- महत्व: उनके वैवाहिक जीवन के सात वचनों का प्रतीक है।
- संगीत
- रस्म: संगीत का उत्सव, जिसमें दोनों परिवार शामिल होते हैं।
- महत्व: परिवारों के बीच खुशी और एकता बढ़ाता है।
- बधाई
- रस्म: शादी के बाद संगीत और नृत्य के साथ उत्सव।
- महत्व: समाज में आपसी जुड़ाव मज़बूत होता है और खुशियाँ फैलती हैं।
- विदाई
- रस्म: दुल्हन पति के घर जाते समय अपने परिवार से विदा लेती है।
- महत्व: विवाह की ओर उसकी नई यात्रा का प्रतीक है।
- मुंडन की रस्म
- रस्म: दुल्हन के बालों का कुछ हिस्सा मूँड़ा या काटा जाता है।
- महत्व: पुरानी पहचान छोड़कर वैवाहिक जीवन अपनाने का प्रतीक है।
कर्नाटक
- नंदी पूजा
- रस्म: शादी से पहले दूल्हा नंदी (पवित्र बैल) की पूजा करता है।
- महत्व: श्रद्धा का प्रतीक है और समृद्ध वैवाहिक जीवन के लिए आशीर्वाद माँगा जाता है।
- हल्दी की रस्म
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन को हल्दी लगाई जाती है।
- महत्व: जोड़े को शुद्ध करती है और उनकी सुंदरता निखारती है।
- काशी यात्रा
- रस्म: दूल्हा काशी जाने का स्वाँग करता है और दुल्हन के पिता उसे रोक लेते हैं।
- महत्व: गृहस्थ जीवन के प्रति निष्ठा को दर्शाती है।
- संगीत
- रस्म: आने वाली शादी की खुशी में संगीत और नृत्य की एक रात।
- महत्व: दोनों परिवारों के बीच मेल-जोल बढ़ता है।
- मंगल्य धारणा
- रस्म: दूल्हा दुल्हन के गले में पवित्र सूत्र बाँधता है।
- महत्व: उनके मिलन और दुल्हन के विवाहित होने का प्रतीक है।
- गृहप्रवेश
- रस्म: दुल्हन का उसके नए घर में रस्म के साथ प्रवेश कराकर स्वागत किया जाता है।
- महत्व: उसके नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक है और आशीर्वाद लाती है।
- पूजा (होम)
- रस्म: जोड़े द्वारा की जाने वाली पवित्र अग्नि की पूजा।
- महत्व: उनके वैवाहिक जीवन के लिए ईश्वर का आशीर्वाद मिलता है।
- रिसेप्शन
- रस्म: भव्य उत्सव, जिसमें परिवार और दोस्त जोड़े को बधाई देने के लिए जुटते हैं।
- महत्व: समाज के रिश्ते मज़बूत होते हैं और सब मिलकर जश्न मना पाते हैं।
केरल
- निश्चयम
- रस्म: औपचारिक सगाई, जिसमें शादी की तारीख तय की जाती है।
- महत्व: शादी की तैयारियों की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक है।
- मेहंदी
- रस्म: दुल्हन के हाथों और पैरों में मेहंदी लगाई जाती है।
- महत्व: उत्सव का उल्लास बढ़ाती है और खुशी का प्रतीक है।
- कल्याणम
- रस्म: विवाह की रस्म, जिसमें दूल्हा दुल्हन के गले में थाली (मंगलसूत्र) बाँधता है।
- महत्व: मिलन और दुल्हन के नए दर्जे को औपचारिक रूप देती है।
- सद्या
- रस्म: केले के पत्तों पर परोसा जाने वाला पारंपरिक भोज।
- महत्व: मेहमाननवाज़ी और समृद्धि का प्रतीक है।
- कुडिवेप्पु
- रस्म: दुल्हन का उसके नए घर में जलते दीपक के साथ स्वागत किया जाता है।
- महत्व: उसके नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक है।
लद्दाख
- रोका
- रस्म: उपहारों के आदान-प्रदान के साथ औपचारिक सगाई।
- महत्व: दोनों परिवारों के बीच रिश्ते की औपचारिक घोषणा होती है।
- हल्दी
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन को हल्दी का उबटन लगाया जाता है।
- महत्व: शादी से पहले उन्हें शुद्ध करती है और उनकी सुंदरता निखारती है।
- पारंपरिक संगीत और नृत्य
- रस्म: स्थानीय कलाकार अपनी प्रस्तुति देते हैं।
- महत्व: शादी के उत्सव में सांस्कृतिक रंग और खुशी भर देती है।
- कन्यादान
- रस्म: दुल्हन का परिवार उसका हाथ दूल्हे को सौंपता है।
- महत्व: दुल्हन के दूल्हे के परिवार में औपचारिक रूप से जाने का प्रतीक है।
- सप्तपदी
- रस्म: जोड़ा पवित्र अग्नि के चारों ओर सात कदम चलता है।
- महत्व: हर कदम उनके वैवाहिक जीवन के एक वचन का प्रतीक है।
- विदाई
- रस्म: दुल्हन अपने परिवार से विदा लेती है।
- महत्व: दूल्हे के साथ उसके नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक है।
- रिसेप्शन
- रस्म: एक औपचारिक आयोजन, जिसमें जोड़े का परिचय दूल्हे के विस्तृत परिवार से कराया जाता है।
- महत्व: उनके मिलन और साथ के नए जीवन का जश्न मनाया जाता है।
- गृहप्रवेश
- रस्म: दुल्हन का उसके नए घर में स्वागत किया जाता है।
- महत्व: दूल्हे के परिवार में उसकी नई भूमिका का प्रतीक है।
लक्षद्वीप
- निकाह की रस्म
- रस्म: एक औपचारिक सगाई, जिसमें दोनों परिवार बैठकर विवाह की बात पक्की करते हैं।
- महत्व: यह जोड़े और उनके परिवारों के बीच आधिकारिक वादे का प्रतीक है।
- मेहंदी की रस्म
- रस्म: दुल्हन के हाथों और पैरों पर मेहंदी के सुंदर डिज़ाइन बनाए जाते हैं।
- महत्व: यह दुल्हन के सौंदर्य और सौभाग्य का प्रतीक है।
- हल्दी की रस्म
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन को हल्दी का लेप लगाया जाता है।
- महत्व: विवाह से पहले यह जोड़े को शुद्ध करती है और उनकी सुंदरता निखारती है।
- निकाह
- रस्म: विवाह की रस्म, जिसमें जोड़ा वचन लेता है और अंगूठियाँ पहनाता है।
- महत्व: यह परिवार और समाज के सामने एक-दूसरे के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- वलीमा
- रस्म: विवाह के बाद दूल्हे के परिवार की ओर से दिया जाने वाला स्वागत समारोह।
- महत्व: यह मिलन का उत्सव है, जिसमें परिवार और मित्र जोड़े को बधाई देते हैं।
- गृह प्रवेश
- रस्म: दुल्हन का उसके नए घर में स्वागत किया जाता है।
- महत्व: यह उसके नए जीवन और नए घर-परिवार की शुरुआत का प्रतीक है।
मध्य प्रदेश
- रोका
- रस्म: औपचारिक सगाई, जिसमें उपहारों और मिठाइयों का आदान-प्रदान होता है।
- महत्व: यह जोड़े के बीच वादे को आधिकारिक रूप से तय करता है।
- हल्दी
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन को हल्दी का लेप लगाया जाता है।
- महत्व: विवाह से पहले यह उन्हें शुद्ध करती है और उनका रूप निखारती है।
- संगीत
- रस्म: परिवार के सदस्य गीत गाते और नृत्य करते हैं।
- महत्व: इससे दोनों परिवारों के बीच खुशी और आपसी मेलजोल बढ़ता है।
- कन्यादान
- रस्म: दुल्हन का परिवार उसका हाथ दूल्हे को सौंपता है।
- महत्व: यह दुल्हन को औपचारिक रूप से दूल्हे के परिवार को सौंपने का प्रतीक है।
- सप्तपदी
- रस्म: जोड़ा पवित्र अग्नि के चारों ओर सात कदम चलता है।
- महत्व: ये विवाह के सात वचनों को दर्शाते हैं।
- विदाई
- रस्म: दुल्हन अपने परिवार से विदा लेती है।
- महत्व: यह दूल्हे के साथ उसके नए जीवन की ओर कदम का प्रतीक है।
- रिसेप्शन
- रस्म: जोड़े को दूल्हे के विस्तृत परिवार से मिलवाने के लिए एक औपचारिक आयोजन।
- महत्व: यह उनके मिलन और साथ बिताए जाने वाले नए जीवन का उत्सव है।
- गृह प्रवेश
- रस्म: दुल्हन का उसके नए घर में स्वागत किया जाता है।
- महत्व: यह दूल्हे के परिवार में उसकी नई भूमिका का प्रतीक है।
महाराष्ट्र
- साखर पुड़ा
- रस्म: सगाई के समय जोड़ा शक्कर के पैकेट का आदान-प्रदान करता है।
- महत्व: यह उनके आने वाले जीवन की मिठास का प्रतीक है।
- केळवण
- रस्म: दिव्य आशीर्वाद पाने के लिए दोनों घरों में पूजा की जाती है।
- महत्व: इससे सुखी और समृद्ध वैवाहिक जीवन सुनिश्चित होता है।
- सीमांत पूजा
- रस्म: दुल्हन के परिवार के पहुँचने पर दूल्हे के घर पर की जाती है।
- महत्व: इसमें दुल्हन का दूल्हे के परिवार में स्वागत किया जाता है।
- संकल्प
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन एक-दूसरे को वरमाला पहनाते हैं और वचन लेते हैं।
- महत्व: यह एक-दूसरे के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
- सप्तपदी
- रस्म: जोड़ा पवित्र अग्नि के चारों ओर सात कदम चलता है।
- महत्व: हर कदम एक वैवाहिक वचन को दर्शाता है।
- लक्ष्मी नारायण पूजा
- रस्म: दूल्हा दुल्हन के स्वागत के लिए पूजा करता है।
- महत्व: इससे समृद्धि और सुख का आशीर्वाद माँगा जाता है।
मणिपुर
- हिनाबा (रिश्ता तय करने की रस्म)
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन के परिवार औपचारिक बातचीत के लिए मिलते हैं।
- महत्व: इससे आपसी सहमति और समझ बनती है।
- यथांग तनाबा (स्वीकृति की रस्म)
- रस्म: दोनों परिवार विवाह आगे बढ़ाने की औपचारिक स्वीकृति देते हैं।
- महत्व: यह दोनों पक्षों की प्रतिबद्धता को दिखाता है।
- वारोइपोट पुबा (सगाई)
- रस्म: परिवार और मित्रों की उपस्थिति में जोड़े की औपचारिक सगाई होती है।
- महत्व: यह जोड़े के बीच विवाह के वादे का प्रतीक है।
- लुहोंगबा (विवाह समारोह)
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन एक-दूसरे को माला पहनाते हैं और वचन लेते हैं।
- महत्व: इससे जोड़ा पति-पत्नी घोषित होता है।
- फिरेल थबा (विवाह भोज)
- रस्म: परिवारों और समाज के लिए एक भव्य भोज का आयोजन किया जाता है।
- महत्व: यह जोड़े के मिलन का उत्सव है।
- सप्तपदी
- रस्म: जोड़ा पवित्र अग्नि के चारों ओर सात कदम चलता है।
- महत्व: ये विवाह के सात वचनों को दर्शाते हैं।
- नुपी कीथेल
- रस्म: नवविवाहित जोड़े का स्थानीय महिला बाज़ार में सम्मान किया जाता है।
- महत्व: यह विवाह का उत्सव मनाने वाला सामुदायिक आयोजन है।
- मंगनी चकौबा
- रस्म: विवाह के बाद दूल्हा-दुल्हन दुल्हन के घर भोज के लिए जाते हैं।
- महत्व: इससे दुल्हन के परिवार के साथ रिश्ता और मज़बूत होता है।
- इपान थबा (चावल भेंट करना)
- रस्म: दुल्हन का परिवार दूल्हे के घर चावल भेंट करता है।
- महत्व: यह पति के परिवार में दुल्हन की नई भूमिका का प्रतीक है।
मेघालय
- रोका
- रस्म: औपचारिक सगाई, जिसमें उपहारों और मिठाइयों का आदान-प्रदान होता है।
- महत्व: यह दोनों परिवारों के बीच वादे को दर्शाता है।
- हल्दी
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन को हल्दी का लेप लगाया जाता है।
- महत्व: यह उन्हें शुद्ध करती है और उनका रूप निखारती है।
- पारंपरिक नृत्य
- रस्म: परिवार और मित्र नृत्य प्रस्तुत करते हैं।
- महत्व: यह आने वाले विवाह की खुशी का उत्सव है।
- कन्यादान
- रस्म: दुल्हन का परिवार उसका हाथ दूल्हे को सौंपता है।
- महत्व: यह दुल्हन को औपचारिक रूप से दूल्हे के परिवार को सौंपने का प्रतीक है।
- सप्तपदी
- रस्म: जोड़ा पवित्र अग्नि के चारों ओर सात कदम चलता है।
- महत्व: हर कदम उनके वैवाहिक जीवन के एक वचन को दर्शाता है।
- विदाई
- रस्म: दुल्हन अपने परिवार से विदा लेती है।
- महत्व: यह दूल्हे के साथ उसके नए जीवन की ओर कदम का प्रतीक है।
- रिसेप्शन
- रस्म: जोड़े को दूल्हे के विस्तृत परिवार से मिलवाने के लिए एक औपचारिक आयोजन।
- महत्व: यह उनके मिलन और साथ बिताए जाने वाले नए जीवन का उत्सव है।
- गृह प्रवेश
- रस्म: दुल्हन का उसके नए घर में स्वागत किया जाता है।
- महत्व: यह दूल्हे के परिवार में उसकी नई भूमिका का प्रतीक है।
मिज़ोरम
- सगाई समारोह
- रस्म: जोड़ा उपहारों और अंगूठियों का आदान-प्रदान करता है।
- महत्व: यह विवाह के औपचारिक वादे का प्रतीक है।
- हल्दी
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन को हल्दी का लेप लगाया जाता है।
- महत्व: यह उन्हें शुद्ध करती है और उनका रूप निखारती है।
- पारंपरिक नृत्य
- रस्म: परिवार और मित्र नृत्य प्रस्तुत करते हैं।
- महत्व: यह आने वाले विवाह की खुशी का उत्सव है।
- वचन आदान-प्रदान
- रस्म: जोड़ा परिवार और मित्रों के सामने एक-दूसरे को वचन देता है।
- महत्व: यह एक-दूसरे के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- मंगल पूजा
- रस्म: पवित्र अग्नि के चारों ओर रस्में निभाई जाती हैं।
- महत्व: यह विवाह की पवित्रता का प्रतीक है।
- विदाई
- रस्म: दुल्हन अपने परिवार से विदा लेती है।
- महत्व: यह दूल्हे के साथ उसके नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक है।
- रिसेप्शन
- रस्म: जोड़े को दूल्हे के विस्तृत परिवार और मित्रों से मिलवाने के लिए एक औपचारिक आयोजन।
- महत्व: यह उनके मिलन का उत्सव है।
- गृह प्रवेश
- रस्म: दुल्हन का उसके नए घर में स्वागत किया जाता है।
- महत्व: यह दूल्हे के परिवार में उसकी नई भूमिका का प्रतीक है।
- विवाह के बाद की पूजा
- रस्म: जोड़े के भविष्य के लिए आशीर्वाद माँगने हेतु की जाती है।
- महत्व: इससे समृद्ध वैवाहिक जीवन सुनिश्चित होता है।
- आशीर्वाद समारोह
- रस्म: बड़े-बुज़ुर्ग नवविवाहितों को आशीर्वाद देते हैं।
- महत्व: इससे सफल विवाह के लिए आशीर्वाद माँगा जाता है।
नागालैंड
- रोका
- रस्म: औपचारिक सगाई, जिसमें उपहारों का आदान-प्रदान होता है।
- महत्व: यह दोनों परिवारों के बीच वादे को आधिकारिक रूप से तय करता है।
- हल्दी
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन को हल्दी का लेप लगाया जाता है।
- महत्व: विवाह से पहले यह उन्हें शुद्ध करती है और उनका रूप निखारती है।
- पारंपरिक भोज
- रस्म: परिवार और मित्रों के साथ उत्सव का भोजन।
- महत्व: यह आने वाले मिलन का उत्सव है और पारिवारिक रिश्तों को मज़बूत करता है।
- कन्यादान
- रस्म: दुल्हन का परिवार उसका हाथ दूल्हे को सौंपता है।
- महत्व: यह दुल्हन को औपचारिक रूप से दूल्हे के परिवार को सौंपने का प्रतीक है।
- सप्तपदी
- रस्म: जोड़ा पवित्र अग्नि के चारों ओर सात कदम चलता है।
- महत्व: हर कदम उनके वैवाहिक जीवन के एक वचन को दर्शाता है।
- विदाई
- रस्म: दुल्हन अपने परिवार से विदा लेती है।
- महत्व: यह दूल्हे के साथ उसके नए जीवन की ओर कदम का प्रतीक है।
- रिसेप्शन
- रस्म: जोड़े को दूल्हे के विस्तृत परिवार से मिलवाने के लिए एक औपचारिक आयोजन।
- महत्व: यह उनके मिलन और साथ बिताए जाने वाले नए जीवन का उत्सव है।
- गृह प्रवेश
- रस्म: दुल्हन का उसके नए घर में स्वागत किया जाता है।
- महत्व: यह दूल्हे के परिवार में उसकी नई भूमिका का प्रतीक है।
ओडिशा
- जयी अनुकोलो (निमंत्रण की रस्म)
- रस्म: रिश्तेदारों और मित्रों को निमंत्रण पत्र भेजे जाते हैं।
- महत्व: यह विवाह की औपचारिक घोषणा का प्रतीक है।
- मंगन (हल्दी की रस्म)
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन को हल्दी का लेप लगाया जाता है।
- महत्व: विवाह से पहले यह जोड़े को शुद्ध करती है और उनकी सुंदरता निखारती है।
- दीया मंगला पूजा
- रस्म: आशीर्वाद के लिए भगवान जगन्नाथ की पूजा की जाती है।
- महत्व: इसमें सामंजस्यपूर्ण वैवाहिक जीवन के लिए दिव्य सुरक्षा माँगी जाती है।
- निर्बंध
- रस्म: औपचारिक सगाई, जिसमें वचनों का आदान-प्रदान होता है।
- महत्व: यह विवाह-संबंध की आधिकारिक पुष्टि है।
- बादुआ पानी गढ़ुआ (स्नान की रस्म)
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन रस्म के रूप में स्नान करते हैं।
- महत्व: यह विवाह से पहले जोड़े को शुद्ध करता है।
- कन्यादान
- रस्म: दुल्हन के पिता उसे दूल्हे को सौंपते हैं।
- महत्व: यह दुल्हन के वैवाहिक जीवन में प्रवेश का प्रतीक है।
- हाथ ग्रंथि फीता (गाँठ बाँधना)
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन के हाथ एक पवित्र कपड़े से बाँधे जाते हैं।
- महत्व: यह विवाह में उनके एक हो जाने का प्रतीक है।
- सप्तपदी
- रस्म: जोड़ा साथ मिलकर सात पवित्र कदम चलता है।
- महत्व: ये सुखी वैवाहिक जीवन के सात वचनों को दर्शाते हैं।
- गृह प्रवेश
- रस्म: दुल्हन पहली बार अपने पति के घर में प्रवेश करती है।
- महत्व: यह नए घर-परिवार में उसके प्रवेश का प्रतीक है।
- चौथी
- रस्म: चार दिन बाद दूल्हा-दुल्हन दुल्हन के मायके जाते हैं।
- महत्व: इससे दुल्हन का अपने परिवार से जुड़ाव फिर से पक्का होता है।
पुदुचेरी
- रोका
- रस्म: औपचारिक सगाई, जिसमें उपहारों का आदान-प्रदान होता है।
- महत्व: यह दोनों परिवारों के बीच वादे को आधिकारिक रूप से तय करता है।
- हल्दी
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन को हल्दी का लेप लगाया जाता है।
- महत्व: विवाह से पहले यह उन्हें शुद्ध करती है और उनका रूप निखारती है।
- पारंपरिक संगीत और नृत्य
- रस्म: स्थानीय नृत्य और संगीत की प्रस्तुतियाँ।
- महत्व: इससे विवाह की तैयारियों में खुशी और उत्सव का माहौल बनता है।
- कन्यादान
- रस्म: दुल्हन का परिवार उसका हाथ दूल्हे को सौंपता है।
- महत्व: यह दुल्हन को औपचारिक रूप से दूल्हे के परिवार को सौंपने का प्रतीक है।
- सप्तपदी
- रस्म: जोड़ा पवित्र अग्नि के चारों ओर सात कदम चलता है।
- महत्व: हर कदम उनके वैवाहिक जीवन के एक वचन को दर्शाता है।
- विदाई
- रस्म: दुल्हन अपने परिवार से विदा लेती है।
- महत्व: यह दूल्हे के साथ उसके नए जीवन की ओर कदम का प्रतीक है।
- रिसेप्शन
- रस्म: जोड़े को दूल्हे के विस्तृत परिवार से मिलवाने के लिए एक औपचारिक आयोजन।
- महत्व: यह उनके मिलन और साथ बिताए जाने वाले नए जीवन का उत्सव है।
- गृह प्रवेश
- रस्म: दुल्हन का उसके नए घर में स्वागत किया जाता है।
- महत्व: यह दूल्हे के परिवार में उसकी नई भूमिका का प्रतीक है।
पंजाब
- रोका की रस्म
- रस्म: सगाई को औपचारिक रूप देने के लिए दोनों परिवार मिलते हैं और उपहारों का आदान-प्रदान करते हैं।
- महत्व: यह विवाह की तैयारियों की शुरुआत और आधिकारिक वादे का प्रतीक है।
- चुन्नी की रस्म
- रस्म: दूल्हे का परिवार दुल्हन को लाल चुन्नी और गहने भेंट करता है।
- महत्व: यह दूल्हे के परिवार द्वारा दुल्हन को अपनाने का प्रतीक है।
- जागो
- रस्म: विवाह से पहले की रात, जिसमें सजे हुए घड़ों के साथ नाच-गाना होता है।
- महत्व: यह विवाह का उत्सव है और इसमें समाज का आशीर्वाद माँगा जाता है।
- संगीत
- रस्म: उत्सव मनाने के लिए परिवार गीत गाते और नृत्य करते हैं।
- महत्व: इससे दोनों परिवारों के बीच खुशी और आपसी मेलजोल बढ़ता है।
- मेहंदी
- रस्म: दुल्हन के हाथों और पैरों पर मेहंदी लगाई जाती है।
- महत्व: यह सौभाग्य और शुभता का प्रतीक है।
- चूड़ा रस्म
- रस्म: दुल्हन के मामा उसे लाल और हाथीदाँत जैसे सफ़ेद रंग की चूड़ियाँ भेंट करते हैं।
- महत्व: यह दुल्हन के विवाहित होने का प्रतीक है और विवाह के बाद पहनी जाती हैं।
- कलीरे की रस्म
- रस्म: दुल्हन की चूड़ियों में सुनहरे कलीरे बाँधे जाते हैं और उन्हें अविवाहित लड़कियों के ऊपर झटका जाता है।
- महत्व: माना जाता है कि इससे पता चलता है कि अगली शादी किस लड़की की होगी।
- आनंद कारज
- रस्म: जोड़ा गुरु ग्रंथ साहिब के चार फेरे लेता है।
- महत्व: यह आध्यात्मिक प्रतिबद्धता और सिख वैवाहिक सिद्धांतों का प्रतीक है।
राजस्थान
- रोका की रस्म
- रस्म: सगाई को औपचारिक रूप देने के लिए दोनों परिवार मिलते हैं और उपहारों का आदान-प्रदान करते हैं।
- महत्व: यह जोड़े और उनके परिवारों के बीच आधिकारिक वादे को दर्शाता है।
- संगीत
- रस्म: संगीत और नृत्य की एक रात, जिसमें दोनों परिवार शामिल होते हैं।
- महत्व: यह आने वाले विवाह का उत्सव है और इससे खुशी और एकता बढ़ती है।
- मेहंदी की रस्म
- रस्म: दुल्हन के हाथों और पैरों पर बारीक डिज़ाइन में मेहंदी लगाई जाती है।
- महत्व: यह दुल्हन के सौंदर्य और सौभाग्य का प्रतीक है।
- हल्दी की रस्म
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन को हल्दी का लेप लगाया जाता है।
- महत्व: विवाह से पहले यह जोड़े को शुद्ध करती है और उनकी सुंदरता निखारती है।
- बिदाई
- रस्म: दुल्हन अपने परिवार से विदा लेकर पति के घर जाती है।
- महत्व: यह उसके नए परिवार में प्रवेश का प्रतीक है।
- गृह प्रवेश
- रस्म: दुल्हन का उसके नए घर में रस्मों के साथ स्वागत किया जाता है।
- महत्व: यह उसके नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक है और घर में आशीर्वाद लाता है।
- रिसेप्शन
- रस्म: परिवार और मित्रों के साथ संगीत और नृत्य वाला भव्य उत्सव।
- महत्व: इसमें परिवार साथ मिलकर खुशियाँ मनाते हैं और जोड़े का स्वागत करते हैं।
- चूड़ा रस्म
- रस्म: दुल्हन को उसके मामा चूड़ियाँ भेंट करते हैं।
- महत्व: यह उसके विवाहित होने का प्रतीक है और विवाह के बाद पहनी जाती हैं।
सिक्किम
- सगाई समारोह
- रस्म: दोनों परिवार उपहारों और मिठाइयों का आदान-प्रदान करते हैं।
- महत्व: यह विवाह के औपचारिक वादे का प्रतीक है।
- विवाह-पूर्व पूजा
- रस्म: विवाह से पहले धार्मिक रस्में निभाई जाती हैं।
- महत्व: इसमें विवाह के निर्विघ्न संपन्न होने के लिए आशीर्वाद माँगा जाता है।
- हल्दी
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन को हल्दी का लेप लगाया जाता है।
- महत्व: यह उन्हें शुद्ध करती है और उनकी सुंदरता निखारती है।
- वरमाला
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन एक-दूसरे को फूलों की माला पहनाते हैं।
- महत्व: यह आपसी स्वीकृति का प्रतीक है।
- फूलों की चादर
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन के ऊपर फूलों की चादर तानी जाती है।
- महत्व: यह दिव्य आशीर्वाद का प्रतीक है।
- सात फेरे
- रस्म: जोड़ा पवित्र अग्नि के चारों ओर सात फेरे लेता है।
- महत्व: ये विवाह के सात वचनों को दर्शाते हैं।
- विदाई
- रस्म: दुल्हन अपने परिवार से विदा लेती है।
- महत्व: यह दूल्हे के साथ उसके नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक है।
- रिसेप्शन
- रस्म: जोड़े को दूल्हे के विस्तृत परिवार और मित्रों से मिलवाने के लिए एक औपचारिक आयोजन।
- महत्व: यह उनके मिलन का उत्सव है।
- गृह प्रवेश
- रस्म: दुल्हन का उसके नए घर में स्वागत किया जाता है।
- महत्व: यह दूल्हे के परिवार में उसकी नई भूमिका का प्रतीक है।
- विवाह के बाद की पूजा
- रस्म: जोड़े के भविष्य के लिए आशीर्वाद माँगने हेतु की जाती है।
- महत्व: इससे समृद्ध और सुखी वैवाहिक जीवन सुनिश्चित होता है।
तमिलनाडु
- पंडा काल मुहूर्तम
- रस्म: विवाह के निर्विघ्न संपन्न होने के लिए विवाह से पहले की जाने वाली प्रार्थना।
- महत्व: इसमें जोड़े और परिवारों के लिए दिव्य आशीर्वाद माँगा जाता है।
- व्रतम
- रस्म: जोड़ा शुद्धि के लिए उपवास और रस्मों का पालन करता है।
- महत्व: यह जोड़े को विवाह के लिए आध्यात्मिक रूप से तैयार करता है।
- पल्लिकै तेळिचल
- रस्म: अनाज भरे मिट्टी के घड़ों को पानी में डुबोया जाता है।
- महत्व: यह उर्वरता और समृद्धि का प्रतीक है।
- काशी यात्रा
- रस्म: दूल्हा काशी जाने का नाटक करता है, लेकिन दुल्हन के पिता उसे रोक लेते हैं।
- महत्व: यह दूल्हे द्वारा संन्यास के बजाय गृहस्थ जीवन चुनने का प्रतीक है।
- मांगल्य धारणम
- रस्म: दूल्हा दुल्हन के गले में मंगलसूत्र बाँधता है।
- महत्व: यह जोड़े के मिलन का प्रतीक है।
- सप्तपदी
- रस्म: जोड़ा पवित्र अग्नि के चारों ओर सात कदम चलता है।
- महत्व: हर कदम एक वैवाहिक वचन को दर्शाता है।
- नलंगु
- रस्म: विवाह के बाद दूल्हा-दुल्हन के बीच खेले जाने वाले खेल।
- महत्व: इससे विवाह के बाद आपसी नज़दीकी और खुशी बढ़ती है।
- निश्चयम
- रस्म: औपचारिक सगाई की रस्म, जिसमें विवाह की तिथि तय की जाती है।
- महत्व: इससे विवाह की तैयारियाँ आधिकारिक रूप से शुरू होती हैं।
- मेहंदी
- रस्म: दुल्हन के हाथों और पैरों पर मेहंदी लगाई जाती है।
- महत्व: यह उत्सव के माहौल को और खुशनुमा बनाती है और आनंद का प्रतीक है।
- थाली कट्टू
- रस्म: दूल्हा दुल्हन के गले में मंगलसूत्र (पवित्र धागा) बाँधता है।
- महत्व: यह जोड़े के औपचारिक मिलन को दर्शाता है।
तेलंगाना
- नक्षत्रम
- रस्म: जोड़े की कुंडली के मिलान की जाँच की जाती है।
- महत्व: इससे विवाह के शुभ समय और दोनों की अनुकूलता सुनिश्चित होती है।
- पेल्ली पंडिरि
- रस्म: विवाह से पहले की रस्में, जिनमें हल्दी का लेप लगाया जाता है।
- महत्व: यह दुल्हन को शुद्ध करता है और उसकी सुंदरता निखारता है।
- ऊँजल
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन को एक सजे हुए झूले पर बिठाया जाता है।
- महत्व: यह आनंद और खुशी का प्रतीक है।
- वरमाला
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन एक-दूसरे को फूलों की माला पहनाते हैं।
- महत्व: यह आपसी स्वीकृति और सम्मान का प्रतीक है।
- अग्नि पूजा
- रस्म: पवित्र अग्नि के चारों ओर रस्में निभाई जाती हैं।
- महत्व: अग्नि विवाह के वचनों की साक्षी बनती है।
- सप्तपदी
- रस्म: जोड़ा पवित्र अग्नि के चारों ओर सात कदम चलता है।
- महत्व: ये विवाह के सात वचनों को दर्शाते हैं।
- विदाई
- रस्म: दुल्हन अपने परिवार से विदा लेती है।
- महत्व: यह दूल्हे के साथ उसके नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक है।
- रिसेप्शन
- रस्म: जोड़े को दूल्हे के विस्तृत परिवार और मित्रों से मिलवाने के लिए एक औपचारिक आयोजन।
- महत्व: यह उनके मिलन और साथ बिताए जाने वाले नए जीवन का उत्सव है।
- गृह प्रवेश
- रस्म: दुल्हन का उसके नए घर में स्वागत किया जाता है।
- महत्व: यह दूल्हे के परिवार में उसकी नई भूमिका का प्रतीक है।
- सत्यनारायण पूजा
- रस्म: नवविवाहित जोड़ा दिव्य आशीर्वाद के लिए यह पूजा करता है।
- महत्व: इससे समृद्ध और सुखी वैवाहिक जीवन सुनिश्चित होता है।
त्रिपुरा
- बंगाली सगाई (साथ पाक)
- रस्म: दूल्हे का परिवार औपचारिक रूप से दुल्हन के परिवार से रिश्ता जोड़ता है।
- महत्व: इससे दोनों परिवारों के बीच संबंध और प्रतिबद्धता कायम होती है।
- मेहंदी की रस्म
- रस्म: दुल्हन के हाथों और पैरों पर मेहंदी लगाई जाती है।
- महत्व: यह दुल्हन के लिए आनंद और शुभता का प्रतीक है।
- हल्दी की रस्म
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन को हल्दी का लेप लगाया जाता है।
- महत्व: यह जोड़े को शुद्ध करती है और उनकी सुंदरता निखारती है।
- विवाह-पूर्व भोज
- रस्म: परिवार और मित्रों का उत्सव के लिए एक साथ जुटना।
- महत्व: इससे पारिवारिक रिश्ते मज़बूत होते हैं और खुशी फैलती है।
- बिदाई
- रस्म: दुल्हन अपने मायके से पति के घर के लिए विदा होती है।
- महत्व: यह विवाह में उसकी नई शुरुआत को दर्शाता है।
- गृह प्रवेश
- रस्म: दुल्हन का उसके नए घर में स्वागत किया जाता है।
- महत्व: यह उसके नए जीवन और नए घर-परिवार की शुरुआत का प्रतीक है।
- रिसेप्शन
- रस्म: परिवार और मित्रों के साथ उत्सव, जिसमें अक्सर भोजन और मनोरंजन होता है।
- महत्व: इससे सामाजिक रिश्ते मज़बूत होते हैं और सब साथ मिलकर खुशियाँ मनाते हैं।
- बंगाली विवाह के बाद की रस्में
- रस्म: इनमें कई रीतियाँ शामिल हैं, जैसे “बासी बिये” की रस्म, जिसमें जोड़े को आशीर्वाद दिया जाता है।
- महत्व: इससे दोनों परिवारों का आशीर्वाद और स्वीकृति मिलती है।
उत्तर प्रदेश
- मंगनी
- रस्म: सगाई की रस्म, जिसमें जोड़ा अंगूठियों का आदान-प्रदान करता है।
- महत्व: यह रिश्ते को औपचारिक रूप देती है और विवाह की तैयारियों की शुरुआत करती है।
- हल्दी
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन को हल्दी का लेप लगाया जाता है।
- महत्व: यह जोड़े को शुद्ध करती है और उनका रूप निखारती है।
- तिलक की रस्म
- रस्म: दुल्हन का परिवार दूल्हे के माथे पर तिलक लगाता है।
- महत्व: इससे पारिवारिक रिश्ते मज़बूत होते हैं और आने वाले विवाह की घोषणा होती है।
- जयमाला
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन एक-दूसरे को फूलों की माला पहनाते हैं।
- महत्व: यह आपसी स्वीकृति और सम्मान का प्रतीक है।
- फेरे
- रस्म: जोड़ा पवित्र अग्नि के चारों ओर सात बार घूमता है।
- महत्व: ये विवाह के सात वचनों को दर्शाते हैं।
- कन्यादान
- रस्म: दुल्हन के पिता उसका हाथ दूल्हे को सौंपते हैं।
- महत्व: यह पिता के आशीर्वाद और दुल्हन के जीवन के नए चरण का प्रतीक है।
- वर रक्षा
- रस्म: दूल्हे का परिवार दुल्हन के परिवार को उपहार भेंट करता है।
- महत्व: इससे पारिवारिक रिश्तों को सम्मान मिलता है और वे मज़बूत होते हैं।
- माटी कोड़वा
- रस्म: दुल्हन के मामा दूल्हे के सिर पर मिठाई और चावल का मिश्रण रखते हैं।
- महत्व: यह दुल्हन के परिवार द्वारा दूल्हे को अपनाने का प्रतीक है।
उत्तराखंड
- रोका
- रस्म: औपचारिक सगाई, जिसमें उपहारों और मिठाइयों का आदान-प्रदान होता है।
- महत्व: यह जोड़े के बीच वादे को आधिकारिक रूप से तय करता है।
- हल्दी
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन को हल्दी का लेप लगाया जाता है।
- महत्व: विवाह से पहले यह उन्हें शुद्ध करती है और उनका रूप निखारती है।
- चूड़ा रस्म
- रस्म: दुल्हन के मामा उसे चूड़ियों का एक सेट भेंट करते हैं।
- महत्व: यह दुल्हन के विवाहित होने का प्रतीक है।
- कन्यादान
- रस्म: दुल्हन का परिवार उसका हाथ दूल्हे को सौंपता है।
- महत्व: यह दुल्हन को औपचारिक रूप से दूल्हे के परिवार को सौंपने का प्रतीक है।
- सप्तपदी
- रस्म: जोड़ा पवित्र अग्नि के चारों ओर सात कदम चलता है।
- महत्व: हर कदम उनके वैवाहिक जीवन के एक वचन को दर्शाता है।
- विदाई
- रस्म: दुल्हन अपने परिवार से विदा लेती है।
- महत्व: यह दूल्हे के साथ उसके नए जीवन की ओर कदम का प्रतीक है।
- रिसेप्शन
- रस्म: जोड़े को दूल्हे के विस्तृत परिवार से मिलवाने के लिए एक औपचारिक आयोजन।
- महत्व: यह उनके मिलन और साथ बिताए जाने वाले नए जीवन का उत्सव है।
- गृह प्रवेश
- रस्म: दुल्हन का उसके नए घर में स्वागत किया जाता है।
- महत्व: यह दूल्हे के परिवार में उसकी नई भूमिका का प्रतीक है।
पश्चिम बंगाल
- आशीर्वाद
- रस्म: औपचारिक सगाई की रस्म, जिसमें बड़ों का आशीर्वाद मिलता है।
- महत्व: यह विवाह के आधिकारिक वादे का प्रतीक है।
- तत्त्व
- रस्म: विवाह से पहले की रस्में, जिनमें हल्दी लगाना भी शामिल है।
- महत्व: यह दूल्हा-दुल्हन को शुद्ध करता है और विवाह के लिए तैयार करता है।
- गाये होलुद
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन को हल्दी का लेप लगाया जाता है।
- महत्व: विवाह से पहले यह सुंदरता और पवित्रता बढ़ाती है।
- बिये बरण
- रस्म: दुल्हन का परिवार रस्मों और उपहारों के साथ दूल्हे का स्वागत करता है।
- महत्व: यह स्वीकृति और आतिथ्य का प्रतीक है।
- वरमाला
- रस्म: दूल्हा-दुल्हन आपस में फूलों की माला पहनाते हैं।
- महत्व: यह आपसी स्वीकृति का प्रतीक है।
- सात पाके बाँधा
- रस्म: जोड़ा पवित्र अग्नि के चारों ओर सात फेरे लेता है।
- महत्व: ये विवाह के सात वचनों को दर्शाते हैं।
- बिदाई
- रस्म: दुल्हन अपने मायके से विदा होती है।
- महत्व: यह दूल्हे के साथ उसकी नई यात्रा की शुरुआत का प्रतीक है।
- रिसेप्शन
- रस्म: जोड़े को दूल्हे के विस्तृत परिवार और मित्रों से मिलवाने के लिए एक औपचारिक आयोजन।
- महत्व: यह उनके मिलन का उत्सव है।
- गृह प्रवेश
- रस्म: दुल्हन का उसके नए घर में पारंपरिक रस्मों के साथ स्वागत किया जाता है।
- महत्व: यह दूल्हे के परिवार में उसकी नई भूमिका का प्रतीक है।
- विवाह के बाद की पूजा
- रस्म: जोड़े के नए जीवन के लिए आशीर्वाद माँगने हेतु की जाती है।
- महत्व: इससे समृद्धि और सुख सुनिश्चित होता है।
